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शिवरात्रि 2018 निर्णय - पूजन मुहूर्त, पूजन विधि तथा आरती

शिवरात्रि 2018 निर्णय - पूजन मुहूर्त, पूजन विधि तथा आरती   Published on: 2018-02-12 01:46:16

Written by Gajanan Krishna Maharaj

श्री शुभ सम्वत 2074, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, तिथि : चतुर्दशी , मंगलवार, दि. 13/2/2018.

शिवरात्रि पूजन मुहूर्त:

प्रथम पहर : सायं 6:18 से रात्रि 9:27 तक (प्रदोष तथा गोधूलि बेला )
द्वितीय पहर : रात्रि 9:28 से रात्रि 12:38 तक 
तृतीय पहर : मध्यरात्रि 12:39 से 03:37 तक 
चतुर्थ पहर : अर्ध रात्रि के उपरांत 03:37 से अगले दिन सूर्योदय तक 

निशीथ काल : मध्य रात्रि 12:12 से 01:02 तक 

शिवरात्रि पूजन विधि

सर्वप्रथम जल से प्रोक्षणी करके अपने ऊपर जल छिड़कें.

मंत्र : ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाम् गतो पि वा. य: स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स वाह्याभ्यन्तर: शुचि:.

3 बार आचमन करके हाथ धो लें I

आचमन मंत्र: ऊं केशवाय नमः, ऊं माधवाय नमः, ऊं गोविंदाय नमः

हाथ धोने का मंत्र: ऊं ऋषि केशाय नमः हस्तो प्रक्षालम

अब स्वस्तिवाचन करें I

स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवा:, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:, स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु I

इसके उपरांत दीपक प्रज्वलित करें I

गौरी-माता पार्वती का स्मरण करें

फिर पूजन का संकल्प कर भगवान गणेश जी एवं गौरी-माता पार्वती जी का स्मरण कर पूजा करनी चाहिए I

यदि आप रूद्राभिषेक, लघुरूद्र, महारूद्र आदि विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं, तब नवग्रह, कलश, षोडश-मात्रका का भी पूजन करना चाहिए I

संकल्प करते हुए भगवान गणेश जी व माता पार्वती जी का पूजन करें I फिर नन्दीश्वर जी, वीरभद्र जी, कार्तिकेय जी (स्त्रियां कार्तिकेय का पूजन नहीं करें) एवं सर्प का संक्षिप्त पूजन (रोली, चंदन, सिंदूर, चावल, पुष्प नैवेद्य फल से अलंकृत कर) करना चाहिए I  इसके पश्चात हाथ में बिल्वपत्र एवं अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें I

भगवान शिव का ध्यान करने के बाद उनको आसन प्रदान करे I  फिर आचमन कराकर शुद्ध जल से स्नान कराकर, दूध-स्नान दही-स्नान, घी-स्नान, शहद-स्नान व शक्कर-स्नान कराएं I

इसके बाद भगवान का एक साथ पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) स्नान कराएं. उसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं. फिर सुगंधित जल से स्नान कराएं I

प्रसाद चढ़ाकर दक्षिणा आरती करें

अब भगवान् शिव जी को जनेऊ चढाएं I फिर वस्त्र पहना कर उनको रोली, चंदन, चावल, सप्त धान्य, सुगंध, इत्र, पुष्प, पुष्पमाला, बिल्वपत्र से अलंकृत करें I  (महा शिवरात्रि के दिन शिव जी को पुष्पों से ढक कर के अलंकृत नहीं करना चाहिए I  इस दिन सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से दिव्य रूप से अलंकृत करें क्योंकि इस दिन शिव जी का विवाह हुआ था I

इसके पश्चात धूप-दीप जलाएं I फिर भगवान् शिव जी को नैवेद्य एवं विविध प्रकार फलों का भोग लगाएं I  फल, नैवेद्य के बाद पान, सुपारी लौंग-इलायची, नारियल, दक्षिणा चढ़ाकर आरती करें I  इसके बाद क्षमा-प्रार्थना करें I

क्षमा मंत्र : आह्वानं ना जानामि, ना जानामि तवार्चनम, पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर:.

इस प्रकार संक्षिप्त पूजन करने से ही भगवान शिव प्रसन्न होकर सारे मनोरथ पूर्ण करेंगे I  घर में पूरी श्रद्धा के साथ साधारण पूजन भी किया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं I

शिव जी के सभी व्रतों में शिवरात्रि का व्रत सबसे उत्तम बताया गया है I  इसलिए भोग और सुख समृद्धि पाने वाले लोग हर मास की शिवरात्रि को व्रत करते और फल प्राप्त करते और इस व्रत का पालन करना चाहिए क्योंकि इस व्रत से जल्दी ही फल की प्राप्ति होती है I  निष्काम और सकाम भाव रखने वाले सभी मनुष्यों वर्णों स्त्रियों बालक बालिकाओं आदि सभी देहधारियों के लिए हितकर है I

कोई भी व्रत पूर्ण करने से पहले ब्राह्मण भोजन,गौ सेवा अवश्य कराएं , तभी उस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है I

 

शिवजी की आरती 

ॐ जय शिव ओंकारा

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।

सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा

 

Shivji Aarti In English

Jai Shiv Omkara, Om Jai Shiva Omkara,

Bramha, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhaara.

Om Jai Shiv Omkara

Ekaanan Chaturaanan Panchaanan Raje,

Hansaasan Garudaasan Vrishvaahan Saaje.

Om Jai Shiv Omkara

Do Bhuj Chaar Chaturbhuj Dasamukh Ati Sohe,

Trigun Rup Nirakhate Tribhuvan Jan Mohe.

Om Jai Shiv Omkara

Akshamaala Vanamaala Mundamaala Dhaari,

Tripuraari Kansaari Kar Maala Dhaari.

Om Jai Shiv Omkara

Shvetambar Pitambar Baaghambar Ange,

Sanakaadik Garunaadik Bhutaadik Sange.

Om Jai Shiv Omkara

Kar Ke Madhy Kamandalu Chakra Trishuladhaari,

Sukhakaari Dukhahaari Jagapaalan Kaari.

Om Jai Shiv Omkara

Bramha Vishnu Sadaashiv Jaanat Aviveka,

Pranavaakshar Mein Shobhit Ye Tino Ekaa.

Om Jai Shiv Omkara

Lakshmi Va Saavitri Paarvati Sangaa,

Paarvati Ardhaangi, Shivalahari Gangaa.

Om Jai Shiv Omkara

Parvat Sohe Parvati, Shankar Kailasa,

Bhang Dhatur Ka Bhojan, Bhasmi Mein Vaasa.

Om Jai Shiv Omkara

Jataa Me Gang Bahat Hai, Gal Mundan Maala,

Shesh Naag Lipataavat, Odhat Mrugachaala.

Om Jai Shiv Omkara

Kashi Me Viraaje Vishvanaath, Nandi Bramhchaari,

Nit Uthh Darshan Paavat, Mahimaa Ati Bhaari.

Om Jai Shiv Omkara

Trigunasvamiji Ki Aarti Jo Koi Nar Gave,

Kahat Shivanand Svami Sukh Sampati Pave.

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Ravi Pushya Nakshatra In Year 2018

Ravi Pushya Nakshatra In Year 2018   Published on: 2018-01-27 07:17:56

Written by Gajanan Krishna Maharaj

1) 22 April, 18:18 To 29:52

2) 20 May, 05:43 To 06:20

3) 17 June, 05:43 To 06:20

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Guru Pushya Nakshatra In Year 2018

Guru Pushya Nakshatra In Year 2018   Published on: 2018-01-27 07:13:46

Written by Gajanan Krishna Maharaj

1) August 09, 29:44 To 29:56

2) September 5, 15:14 To 29:58

3) October 04, 05:58 To 20:48

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मकर संक्रांति 2018, Makar Sankranti 2018

मकर संक्रांति 2018, Makar Sankranti 2018   Published on: 2018-01-08 06:54:50

Written by Gajanan Krishna Maharaj

सम्वत 2074, शिशिर ऋतू,  माघ मास, कृष्ण पक्ष, त्रयोदशी तिथि, वाणिज्य करन में, दोपहर :01:45 को भगवान् सूर्यनारायण धनु राशि से आगे बढ़कर अपने पुत्र की राशि मकर में प्रवेश करेंगे I इसे संक्रांति या संक्रमण काल भी कहते है I

इस संक्रांति का

नाम- घोरा

नक्षत्र - मूल

भैंसे की सवारी तथा ऊंट को अपना उपवाहन बनाकर,मणियों को धारण कर, शरीर पर महावर को लेप कर, नैऋत्य यानी SOUTH WEST दिशा में दृश्टिगत काले वस्त्र धारण कर, हाथ में खप्पर व् आक का पुष्प लेकर, दही पीते हुए दक्षिण दिशा में धोबी के घर प्रवेश कर रही है I 

किसके लिए शुभ - स्त्रियों, सुदूर यानी दूरस्थ जंगल या वन निवासी, आदिवासी, निर्धन, वयोवृद्ध (Senior Citizens), अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष लाभ I

किसके लिए अशुभ – IMPORT EXPORT का व्यवसाय करने वाले, स्टॉक मार्किट - शेयर मार्किट, वैश्यगण,  शिक्षाविद लोग, लेखक,पत्रकार, वस्त्र से सम्बंधित व्यवसायके लिए थोड़ा सा अशुभ रहेगी I

राष्ट्रीय दृस्टि -  Nationally से यदि हम बात करे तो जनता थोड़ी सी टैक्स के बोझ से जूझेगी, काले रंग की वस्तु एवं डेरी फार्मिंग, रत्न से सम्बंधित व्यवसाय मेहेंगे होंगे I

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष में संक्रांति का फल 

देश में एक नई तरह की राजनीति या एक नया भारत (A NEW INDIA) देखने को मिलेगा I घोटालो से देश मुक्त रहेगा I तकनिकी,अंतरिक्ष विज्ञान एवं डिफेन्स क्षेत्र में भारत विशेष तरक्की करेगा I जनता के लिए टैक्स (Tax) को बोझ बढ़ सकता है I काले रंग की वस्तुए, तथा डेरी फार्मिंग से सम्बंधित व्यवसाय में तेजी रहेगी I राजनीति को नवीनीकरण, शुद्दिकरण होगा I विज्ञान व् तकनिकी में भारत बहुत तरक्की करेगा तथा वर्ष 2018 के प्रारम्भ में ही अंतरिक्ष में भारी सफलता प्राप्त करेगा I

दानादि के लिए पुण्यकाल : 

इस दिन दानादि के लिए यह समय विशेष शुभ रहेगा पुण्यकाल के लिए वैसे तो सारा दिन हे शुभ है परन्तु मुहूर्त विशेष से देखा जाय तो प्रातः 7:21 से सायं 5 बजकर 50 मिनट तक और इस बिच में भी और भी अच्छा मुहूर्त देखा जाय तो दोपहर 2 बजे से सायं 5.5 तक विशेष शुभ रहेगा , इस दिन टिल के लड्डू, या टिल, गुड़, लाल वस्त्र तथा गौ सेवा का विशेष महत्व है I आप जिस जल से स्नान करते है, उसमे तिल डालकर स्नान करे, पिने के जल में भी तिल डालकर पिएI  प्रातः सूर्यनमस्कार करे, भगवान् सूर्यनारायण को अर्घ देना, और सूर्य भगवान् के 12 नाम जैसे ॐ सूर्याय नमः, आदित्या नमः, खगाय नमः, मित्राय नमः, भानवे नमः, हिरण्य गर्भाय नमः, साविताये नमः, ॐ दिवाकराय नमः, प्रभाकराय नमः  या उनके 108 नाम, जो निचे डिसेप्शन में दी गई लिंक से भी आप प्राप्त कर सकते है, उसका पाठ करे I

सूर्य भगवान् के 108 नाम: https://goo.gl/w6L13n

आइये अब जानते है कौनसी राशि के लिए यह संक्रांति शुभ व किसके लिए अशुभ रहेगी I मेष, सिंह व धनु राशि के लिए यह संक्रांति विशेष शुभ नहीं रहेगी एवं वृषभ, कन्या व् मकर राशि के लिए ये माध्यम फलदाई तथा मिथुन कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ तथा मीन राशि के लिए यह संक्रांति शुभ रहेगी I

व्रत उद्यापन निर्णय : इस वर्ष 2018 में शुक्रास्त (तारा अस्त) के कारण किसी भी प्रकार का यमराजादि उद्यापन नहीं किये जा सकेंगे I दान- पुण्यादि में की दोष नहीं है I    

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Jain Festivals In Year 2018

Jain Festivals In Year 2018   Published on: 2017-12-18 08:26:07

Written by Gajanan Krishna Maharaj

January

13, Saturday, Shitalnath Janma Tapa

14, Sunday, Meru Trayodashi, Adinath Nirvana Kalyanak

15, Monday – Rishabhdev Ji Moksh

21, Sunday – Dashlakshan Start

24, Wednesday - Maryada Mahotsava

30, Tuesday – Shri Jitendra Rath Yatra, Dashlakshan End

 Febuary

03 Saturday – Padma Prabhu Ji Moksh

06 Tuesday – Supravshnath Ji Moksh

12 Monday – Muni Suvrathanth Ji Moksh

20 Tuesday – Mallinath Ji  Moksh

22 Thursday – Asthanika Start, Chandraprabhu Ji Moksh

March

01 Thursday – Asthanika End

10 Saturday – Rishabhdev JI Janm

17 Saturday – Anant Naag JI Moksh, Arnath Ji Moksh

21 Wednesday – Dashlakshan Start

22 Thursday – Ajitnath Ji Moksh

23 Friday – Sambhavnath Ji  Moksh

24 Saturday - Ayambil Oli Start

27 Tuesday – Sumitnath Ji Moksh

29 Thursday – Mahavir Jayanti

30 Friday – Dashlakshan End

31 Saturday - Ayambil Oli End

April

15 Sunday - Naminath Ji Moksh

16 Monday - Kunthunath Ji Moksh

18 Wednesday – Rishabhdev Aahar Day

21 Saturday – Abhinandannath Ji Moksh

25 Wednesday - Shri Mahavir Swami Kaivalya Gyan Divas

May

1 Tuesday - Jyeshtha Jinwar Vrat Start  

12 Saturday - Shri Anantnath Janma Tap

14 Monday - Shantinath Ji Moksh

June

17 Sunday - Dharmanath Ji  Moksh

18 Monday – Shruthi Panchami

28 Thursday - Jyeshtha Jinwar Vrat End

July

06 Friday – Vimalnath Ji Moksh

18 Wednesday – Mahavir Ji Garbh

19 Thursday – Neminath Ji Moksh

20 Friday – Asthanika Start

26 Thursday – Choumasi Choudas, Chaturmaas Start

27 Friday – Asthanika End

28 Saturday – Mahavir Shashan Jayanti

 August

17 Friday - Parshavnath JI Moksh

26 Sunday – Shreyanshnath Ji Moksh

September

07 Friday – Paryushan Start

10 Monday – Samvatsari Mahaparv, Kalpasutra Paath, 

11 Tuesday - Tailadhar Tapa

13 Thursday – Paryushan End

14 Friday – Dashlakshan Prarambh, Rishi (Badi) Panchami, Kshamavani Parva

17 Monday – Pushpdant Ji Ji Moksh

19 Wednesday – Dhoop/Sughandh Dashmi

22 Saturday – Ratn Tray Start

23 Sunday – Anant Chaturdashi Vrat, Dashlakshan End, Vasupujya Moksh

25 Tuesday – Ratn Tray End

26 Wednesday – Kshamavani Parv

October

15 Monday - Ayambil Oli Start

17 Wednesday – Shitalnath Ji Moksh

24 Wednesday - Ayambil Oli End

November

05 Monday – Chaturmaas End, Shri Padma Prabhu Janma Tapa

07 Wednesday – Mahavir Nirvaan, Mahavir  Ji Moksh

08 Thursday – Jain Sanvat(New Year) Start

 12 Monday – Gyaan Panchami, Saubhagya Panchami

15 Thursday – Asthanika Start

23 Friday – Asthanika End

December 

2 Sunday - Mahavir Swami Deeksha

19 Wednesday - Mauni Ekadashi

 

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Panchak In Year 2018

Panchak In Year 2018   Published on: 2017-12-18 04:29:53

Written by Gajanan Krishna Maharaj

What Is Panchak.?

Panchak means group of ‘Five’ Nakshatras In every month, it is the period of total five days when Moon transits from Aquarius & Meen zodiac respectively.

How Does Panchak Form?

Dhanishtha nakshatra (Last two charan (parts), Shatbhisha, Purvabhadrapada, Utrabhadrapada and Revati are the five Nakshatras principally four and a half Nakshatras are known as a Panchak. In other words the duration of placement of Moon in Aquarius or Pisces is known as Panchak. 

Panchak In Year 2018

January

Jan 19, 14:17 To 24 Jan, 08:34

Febuary

Feb 15, 20:39 To Feb 20 ,14:03

March

Mar 14,28:13 To Mar 19, 20:08

April

Apr 11, 12:37 To Apr 15, 28:05

May

May 08, 20:59 To May 13, 13:31

June

Jun 04, 28:33 To Jun 09, 23:10

July

Jul 02, 11:08 To Jul 07, 07:40

Jul 29 17:06 …

August

… To Aug 03, 14:25

September

Sep 22, 06:11 To Sep 26, 25:55

October

Oct 19, 14:02 To Oct 24, 0922

November

Nov, 15, 22:17 To Nov 20, 18:34

December

Dec 12, 30:11 To Dec 17, 28:17

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Surya Sankranti (Transist) In Year 2018

Surya Sankranti (Transist) In Year 2018   Published on: 2017-12-18 02:40:18

Written by Gajanan Krishna Maharaj

Makar Sankranti Sunday, 14 January

Kumbh Sankranti Monday, 12 Febuary

Meen Sankranti – Wednesday, 14 March

Mesh Sankranti – Saturday, 14 April

Vrushabh Sankranti – Monday, 14 May

Mithun Sankranti – Friday, 15 June

Kark Sankranti – Monday, 16 July

Singh Sankranti – Friday, 17 August

Kanya Sankranti – Monday, 17 September

Tula Sankranti – Wednesday, 17 October

Vrushchik Sankranti – Friday, 16 November

Dhanu Sankranti – Sunday, 16 Decmeber  

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Sikh Festivals In Year 2018

Sikh Festivals In Year 2018   Published on: 2017-12-18 00:27:41

Written by Gajanan Krishna Maharaj

January

29, Monday – Guru Harraay Jayanti

March

15, Thursday – Guru Harraay Guryaai

18, Sunday – Guru Amardas Guryaai

21, Wednesday – Guru Angad Dev Jyotijot

22, Thursday – Hargobind Singh Jyotijot

30, Friday – Guru Harkishan Singh Jyotijot, Guru Tej Bahadur Gurraai

April

05, Thursday – Guru Teg Bahadur Jayanti

07, Saturday – Guru Arjun Dev Jayanti

16, Monday – Guru Angad Dev Jayanti

30, Friday – Guru Harkishan Singh Jyotijot, Guru Tej Bahadur Gurrai

May

08, Tuesday – Guru Hargobind Guryaai

June

17, Sunday – Guru Arjundev Jyotijot

29, Thursday – Guru Hargobind Singh  Jayanti

August

06, Monday – Guru Karkishan Singh Jayanti

September

10, Monday – Guru Granth Sahib Jayanti

11, TuesdayGuru Arjun Dev Guryaai

12, Wednesday – Guru Ramdas Guryaai

 22, Saturday – Guru Ramdas Guryaai

25, Tuesday – Guru Amardas Jyotijot

30, Sunday – Guru Angad Dev Guryaai

October

04, Thursday – Guru Nanakdev Jyotijot

26, Friday – Ramdas Jayanti

November

02, Friday – Guru Harkishan Singh Guryaai, Guru Harraay Jyotijot

09, Friday – Guru Granth Sahib Guryaai

12, Monday – Guru Gobind Singh Jyotijot

23, Friday – Guru Nanak Dev Jayanti

Decmeber

10, Monday – Guru Gobind Singh Guryaai

12, Wednesday – Guru Tegbahadur Jayanti

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Adhik Maas, Its Importance And  Adhik Maas In Year 2018

Adhik Maas, Its Importance And Adhik Maas In Year 2018   Published on: 2017-11-30 09:32:34

Written by Gajanan Krishna Maharaj

The concept of adhik maas is unique to the tradictional hindu lunar calenders based on the cycles of the moon. A lunar month is around 29.5 days long. Now, a solar month, that is the usual calendar, is 30 to 31 days. The lunar year consists of 354 solar days and solar  year consists of 365 days. So, as uear pass by each lunar month starts earlier to the corresponding solar maonth. There is a difference of 11 days between the lunar and solar year. In every two or three solar years the difference between the two calenders becomes a full month or around 29 days. To Compensate and get the two calenders similar an extra month is added. Vasistha siddhanta, a tretise of sage vasishta, says that the adhik maas occurs after 32 months, 16 days and 8 ghadis. A ghadi is 24 minutes. During each lunar month, Sun ingress into a new sign. During Adhik Maas, there is no Sun ingression or the Surya Sankranti. This is specific to Adhik Maas. The calculation of this month is purely based on the difference that takes place between the solar calendar and the lunar calendar.

Mythology Behind Adhik Maas

As per legends, once Demon Hiranyakashipu had asked for a boon from lord Brahma that no man, animal, sura or asura should cause death to him; further he asked that he should not meet his death in any of the 12 months of the year, in the morning or at night, not inside the house nor outside it, neither by any weapon nor by any object. Bestowed with the boon, Demon Hiranyakashipu thought he had become immortal.

Later Demon Hiranyakashipu meet death at hands of Lord Narasimha who ripped his chest with the claws taking the form of half Lion and Half man , during Adhik Mass around sunset and at the threshold of the palace (neither inside nor outside). Therefore, during Adhik Maas no auspicious festive activity such as marriage, anushthan etc. are performed. Only naam japa, charity and Bhagavat katha, yagya is done.

Rituals Observed During Adhik Maas

During Adhik mass naam japa, charity, Bhagavat katha and yagya is done by sadhak to gains Physical strength, mental balance, firmness of thought and actions, calmness and spiritual satisfaction. The main significance of Adhik Maas is associated with spiritual enlightenment and deliverance from earthly sins.

During the entire month of Adhik Maas along with fasting, yagya and havan reciting Shrimad Devi Bhagavatam, Shrimad Bhagwat puran, Shri Vishnu Puran, Bhavishyottar Puran are carried out by devotees. These acts of spirituality bring ample of religious merit and bring transformation for the better in individuals.

 

Rectifying Doshas Of Horoscope In Adhik Maas

Any planetary dosh  in a horoscope can be regulated during  this month by performing yagya or havan. It is believed that this month holds a special place in the Hindu religion and, therefore, rectifying planetary effects during this month gives positive results 10 times better than performed during any other month as the vedic mantra says “Adhikasya Adhikam Falam”.

What To Do During Adhik Maas

Lord Vishnu, the preserver grants all wishes and desires, eradicates  sins of the past life and helps overcome evils. During this holy month one can chant lord Vishnu stotras like Vishnu sahastranaam, gopal sahastranaam, read srimad bahwgat mahapuran, srimad bahwgat geeta, gopi geet, yagnya of Vishnu panchayatan, shiv panchayatan, ganesh homam etc.

What Not To Do During Adhik Maas

During this month, one cannot perform any kaamik puja. No house warming ceremony (grah pravesh), marriage, new shop opening, new vehicle or accessories buying.

 Adhik Maas In Year 2018

There is an Adhik maas or an extra month which is in year 2018. This Adhik maas is also known as purushottam maas or mal maas . In the year 2018, this adhik maas is from 16 May 2018 to 13 June 2018.

Tags: Adhik Maas, Adhik Maas In 2018, Purushottam Maas, Mal Maas.

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Jain Festivals In Year 2018

Jain Festivals In Year 2018   Published on: 2017-11-30 09:19:03

Written by Gajanan Krishna Maharaj

 

January

15, Monday – Rishabhdev Ji Moksh

21, Sunday – Dashlakshan Start

30, Tuesday – Dashlakshan End

 Febuary

03 Saturday – Padma Prabhu Ji Moksh

06 Tuesday – Supravshnath Ji Moksh

12 Monday – Muni Suvrathanth Ji Moksh

20 Tuesday – Mallinath Ji  Moksh

22 Thursday – Asthanika Start, Chandraprabhu Ji Moksh

March

01 Thursday – Asthanika End

10 Saturday – Rishabhdev JI Janm

17 Saturday – Anant Naag JI Moksh, Arnath Ji Moksh

21 Wednesday – Dashlakshan Start

22 Thursday – Ajitnath Ji Moksh

23 Friday – Sambhavnath Ji  Moksh

27 Tuesday – Sumitnath Ji Moksh

29 Thursday – Mahavir Jayanti

30 Friday – Dashlakshan End

April

15 Sunday - Naminath Ji Moksh

16 Monday - Kunthunath Ji Moksh

18 Wednesday – Rishabhdev Aahar Day

21 Sunday – Abhinandannath Ji Moksh

 

 May

14 Monday - Shantinath Ji Moksh

June

17 Sunday - Dharmanath Ji  Moksh

18 Monday – Shruthi Panchami

July

06 Friday – Vimalnath Ji Moksh

18 Wednesday – Mahavir Ji Garbh

19 Thursday – Neminath Ji Moksh

20 Friday – Asthanika Start

26 Thursday – Choumasi Choudas, Chaturmaas Start

27 Friday – Asthanika End

28 Saturday – Mahavir Shashan Jayanti

 August

17 Friday - Parshavnath JI Moksh

26 Sunday – Shreyanshnath Ji Moksh

September

07 Friday – Paryushan Start

10 Monday – Samvatsari Mahaparv

13 Thursday – Paryushan End

14 Friday – Dashlakshan Prarambh, Rishi (Badi) Panchami

17 Monday – Pushpdant Ji Ji Moksh

19 Wednesday – Dhoop/Sughandh Dashmi

22 Saturday – Ratn Tray Start

23 Sunday – Anant Chaturdashi Vrat, Dashlakshan End, Vasupujya Moksh

25 Tuesday – Ratn Tray End

26 Wednesday – Kshamavani Parv

October

17 Wednesday – Shitalnath Ji Moksh

November

05 Monday – Chaturmaas End

07 Wednesday – Mahavir Nirvaan, Mahavir  Ji Moksh

08 Thursday – Jain Samvat(New Year) Start

 12 Monday – Gyaan Panchami

15 Thursday – Asthanika Start

23 Friday – Asthanika End

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