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महावीर भगवान जी की आरती Bhagwan Mahavir Aarti

महावीर भगवान जी की आरती Bhagwan Mahavir Aarti   Published on: 2017-11-30 22:53:17

Written by Gajanan Krishna Maharaj

ॐ जय महावीर प्रभु, स्वामी जय महावीर प्रभु

कुंडलपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभो ....

ॐ जय महा....॥

 

सिद्धारथ घर जन्में, वैभव था भारी, स्वामी वैभव था भारी।

बाल ब्रह्मचारी व्रत, पाल्यो तपधारी॥

ॐ जय महा....॥

 

आतम ज्ञान विरागी, समदृष्टि धारी।

माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति धारी॥

ॐ जय महा....॥

 

जग में पाठ अहिंसा, आप ही विस्तारयो।

हिंसा पाप मिटा कार, सुधर्म परिचारयो॥

ॐ जय महा....॥

 

यही विधि चाँदनपुर में, अतिशय दर्शायो। 

ग्वाल मनोरथ पूरयो, दूध गाय पायो॥

ॐ जय महा....॥

 

प्राणदान मंत्री को, तुमने प्रभु दीना।

मंदिर तीन शिखर का, निर्मित है कीना॥

ॐ जय महा....॥

 

जयपुर नृप भी तेरे, अतिशय के सेवी। 

एक ग्राम तिन दीनों, सेवा हित यह भी॥

ॐ जय महा....॥

 

जो कोई तेरे दर पर, इच्छा कर जावे।

धन, सुत सब कुछ पावै, संकट मिट जावै॥

ॐ जय महा....॥

 

निश दिन प्रभु मंदिर में, जगग ज्योति जरै।

हरि प्रसाद चरणों में, आनंद मोद भरै॥

ॐ जय महा....॥

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Sri Satyanarayan  Aaarti In English

Sri Satyanarayan Aaarti In English   Published on: 2017-11-27 23:17:23

Written by Gajanan Krishna Maharaj

Jai Lakshmi Ramana, Swami Jai Lakshmi Ramana
Satyanarayan Swami, Jan Paatak Harna
Swami Jai Lakshmi Ramana

Ratan Jadhit Sinhaasan, Adbhut Chavi Raaje
Naarad Karat Niraajan, Ghanta Van Baaje
Swami Jai Lakshmi Ramana

Prakat Bhay Kalikaaran, Dwij Ko Daras Diyo
Budho Bramhaan Bankar, Kanchan Mahal Kiyo
Swami Jai Lakshmi Ramna

Durbal Bheel Kathoro, Jin Par Kripa Kari
Chandrachud Ek Raaja, Tinki Vipatti Hari
Swami Jai Lakshmi Ramana

Vaishya Manorath Paayo, Shradha Taj Dinhi
So Fal Bhagyo Prabhuji, Fir Stutui Kinhi
Swami Jai Lakshmi Ramana

Bhav Bhakti Ke Kaaran, Chin Chin Rup Dhrayo
Shradha Dhaaran Kinhi, Tinko Kaaj Saro
Swami Jai Lakshmi Ramana

Gwaaal- Baal Sang Raja, Ban Me Bhakti Kari
Manvaanchit Phal Dinho, Deen Dayalu gHari
Swami Jai Lakshmi Ramana

Chadat Prasad Savaayo Kadali Fal Meva
Dhup Deep Tulsi Se Raaji Satyadeva
Swami Jai Lakshmi Ramana

Satyanarayan Ji Ki Aarti Jo Koi Gaave
Kahat Shivanand Swami Manvaanchit Phal Paave
Swami Jai Lakshmi Ramana

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आरती श्री सत्यनारायणजी  Satyanarayan Aarti

आरती श्री सत्यनारायणजी  Satyanarayan Aarti   Published on: 2017-11-27 23:09:10

Written by Gajanan Krishna Maharaj

जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा।

सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥

जय लक्ष्मीरमणा।

रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे।

नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजे॥

जय लक्ष्मीरमणा।

प्रगट भये कलि कारण द्विज को दर्श दियो।

बूढ़ो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो॥

जय लक्ष्मीरमणा।

दुर्बल भील कठारो इन पर कृपा करी।

चन्द्रचूड़ एक राजा जिनकी विपति हरी॥

जय लक्ष्मीरमणा।

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीनी।

सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर स्तुति कीनी॥

जय लक्ष्मीरमणा।

भाव भक्ति के कारण छिन-छिन रूप धर्यो।

श्रद्धा धारण कीनी तिनको काज सर्यो॥

जय लक्ष्मीरमणा।

ग्वाल बाल संग राजा वन में भक्ति करी।

मनवांछित फल दीनो दीनदयाल हरी॥

जय लक्ष्मीरमणा।

चढ़त प्रसाद सवाया कदली फल मेवा।

धूप दीप तुलसी से राजी सत्यदेवा॥

जय लक्ष्मीरमणा।

श्री सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥

जय लक्ष्मीरमणा।

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श्री रामायणजी की आरती  Aarti Sri Ramayan Ji Ki

श्री रामायणजी की आरती  Aarti Sri Ramayan Ji Ki   Published on: 2017-11-27 22:56:10

Written by Gajanan Krishna Maharaj

श्री रामायणजी की आरती 

आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद। बालमीक विज्ञान विशारद।

शुक सनकादि शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥

आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत वेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस।

मुनि-मन धन सन्तन को सरबस। सार अंश सम्मत सबही की॥

आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत सन्तत शम्भू भवानी। अरु घट सम्भव मुनि विज्ञानी।

व्यास आदि कविबर्ज बखानी। कागभुषुण्डि गरुड़ के ही की॥

आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

कलिमल हरनि विषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।

दलन रोग भव मूरि अमी की। तात मात सब विधि तुलसी की॥

आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

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आरती कुंजबिहारी की  Aarti Kunj Bihari Ki (Krishna Aarti)

आरती कुंजबिहारी की Aarti Kunj Bihari Ki (Krishna Aarti)   Published on: 2017-11-21 00:36:04

Written by Gajanan Krishna Maharaj

आरती कुंजबिहारी की। श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।।
गले में बैजयन्ती माला। बजावै मुरली मधुर बाला।।

श्रवन में कुण्डल झलकाला। नन्द के आनन्द नन्दलाला।।
गगन सम अंग कांति काली। राधिका चमक रही आली।।
लतन मे ठाढ़े बनमाली। भ्रमर सी अलक।
कस्तूरी तिलक, चन्द्रसी झलक। ललित छवि श्यामा प्यारी की।।
श्री गिरधर कृष्णमुरारी की...

कनकमय मोर मुकुट बिलसै। देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बनसै। बजे मुरचंग।
मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग। अतुल रति गोप कुमारी की।।
श्री गिरधर कृष्णमुरारी की...

जहां ते प्रकट भई गंगा। कलुष कलि हारिणी श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा। बसी सिव सीस, जटा के बीज।
हरै अघ कीच, चरण छवि श्रीबनवारी की।।
गिरधर कृष्णमुरारी की...

चमकती उज्ज्वल तट रेनू। बज रही वृन्दावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू। हंसत मृदु मंद चांदनी चंद।
कटत भव फन्द, टेर सुनो दीन भिखारी की।।
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की...

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​​​​​​​आरती विश्‍वकर्मा जी की  Vishwakarma Aarti

​​​​​​​आरती विश्‍वकर्मा जी की Vishwakarma Aarti   Published on: 2017-11-16 23:58:55

Written by Gajanan Krishna Maharaj

जय श्री विश्‍वकर्मा प्रभु जयश्री विश्‍वकर्मा

सकल सृष्टी मे विधि को श्रुति उपदेश दिया

जीव मात्र का जग मे ज्ञान विकास किया

ऋषि अंगिरा तप से शांति नही पाई

रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना

संकट मोचन बनकर दूर दुख कीना

जय श्री विश्‍वकर्मा प्रभु जयश्री विश्‍वकर्मा

जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेक करी

सुनकर दीन प्रार्थना विपत हरी सगरी

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे

द्विभुज चतुभुज दशभुज, सकल रूप सजे

ध्यान धरे तब पद का, सकल सिद्धि आवे

मन द्विभुज मिट जावे, अटल शक्ति पावे

श्री विश्‍वकर्मा की आरती जो कोई गावे

भजत ग़ज़ानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे

जय श्री विश्‍वकर्मा प्रभु जयश्री विश्‍वकर्मा

Vishwakarma Aarti In English

Jai shri vishwakarma prabhu jai shri vishwakarma,
Sakal surishti mein vidi ko stuti updesh diya,
Jeev matr ka jag mein gyan vikas kiya,
Rishi angira tap se shanty ni payi,
Rog girast raja ne jab aashe lina,
Sankat mochan banker dur dukh kina,
Jai shri vishwakarma prabhu jai shri vishwakarma,
Jab rathkar dampati tumhari tek kari,
Sunkar deen prathana vipat hari sagri
Ekanan chturanan panchanan raje,
Dhribhuj chtubhuj dashbhuj sakal roop saje,
Dheyan dhare tab pad ka sakal sidhi aave,
Mann dhribhuj mitt jave akal shakti pave,
Jai shri vishwakarma prabhu jai shri vishwakarma,
Bhajat gajanand swami sukh sampati pave,
Jai shri vishwakarma prabhu jai shri vishwakarma,

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गणेश जी की आरती Ganesh  JI  Aarti

गणेश जी की आरती Ganesh JI Aarti   Published on: 2017-11-15 21:27:32

Written by Gajanan Krishna Maharaj

 

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

 

एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी ।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश, जय गणेश..
पान चढ़ें, फूल चढ़ें और चढ़ें मेवा ।
लडुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश,जय गणेश..

 

अंधें को आँख देत,  कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश.
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दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी

कामना को पूरा करो, जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश..

 

Ganesh Ji Aarti in English

Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesh Deva
Mata Jaki Parvati, Pita Mahadeva

 

Ekadanta Dayavanta, Char Bhujadhaari 
Mathe Par Tilak Sohe,Muse Ki Savari 
Jai Ganesh Jai Ganesh… 

 

Paan Charhe, Phool Charhe Aur Charhe Meva 

Ladduan Ka Bhog Lage,Sant Karein Seva

Jai Ganesh Jai..


Andhe Ko Aankh Det, Korhina Ko Kaya
Baanjhana Ko Putra Det, Nirdhana Ko Maya
Jai Ganesh Jai .. 


Deenana Ki Laaj Rakho, Shambhu Sutavari 
Kaamana Ko Poorna Karo, Jaga Balihari
Jai Ganesh Jai...

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